शिक्षक का महत्व

शिक्षक जिन्हें गुरु या Teacher भी कहा जाता है सम्बोधन भले से ही अलग अलग नामो से किया जाय लेकिन कोई भी शिक्षक का महत्व की तुलना किसी से नही की जा सकती है शिक्षक कार्य ही है लोगो को ज्ञान के माध्यम से सही रास्ता दिखाना. जिसके चलते शिक्षक समाज में सर्वोपरी स्थान रखते है

आईये शिक्षक के महत्व पर एक छोटी सी कहानी बताते है – “एक बार जर्मन के लोगो के सरकारी अफसरों, वकीलों, डॉक्टरो ने हडताल कर दिया मामला कोर्ट में पंहुचा और सुनवाई हुई और दलील दिया गया की सभी लोग इतना मेहनत करते है फिर भी उनका सैलरी शिक्षको से कम क्यू है, इस पर जज ने टिप्पणी की आप लोग बताये आप को डॉक्टर, वकील या अफसर कौन बनाया, शायद ये शिक्षक न होते तो शायद आप लोग इस मुकाम पर आज नही होते तो भला बताईये जो आप लोगो का निर्माण किया हो उसकी सैलरी और आपकी सैलरी कैसे एक बराबर हो सकती है जो कुछ भी आज है उन्ही की बदौलत है इसलिए इस देश में शिक्षक की तुलना किसी से नही की जा सकती है” सच में जिस समाज में शिक्षक का सम्मान होता है वही पर सच्चे समाज का निर्माण भी होता है

हमे गुरु के रूप सर्वप्रथम माँ ही मिलती है जो सबस पहले बोलना सिखाती है और जीवन के प्राथमिक ज्ञान भी हमे अपने माँ से ही मिलता है ज्ञान और सिखाने की परम्परा को लेकर भारत को विश्वगुरु भी कहा जाता रहा है भारत देश में प्राचीन सदियों से ही ऋषियो, मुनियों, गुरुओ और ज्ञानियों का हमारे समाज पर विशेष प्रभाव है जिसके कारण हमारे देश भारत में गुरुओ को भगवान् से भी ऊचा दर्जा दिया गया है जिसकी वर्णन खुद कबीरदास जी ने पाने इस दोहे के माध्यम से क्या है –

“गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागूँ पाँय,
बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो बताय.”

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