आजकल के बच्चे

आजकल के बच्चे                                

आजकल के ये बच्चे
नही लगते अब उतने सच्चे
माँ-बाप की डांट को
नही मानते वो अच्छे
मोबाइल इंटरनेट की दुनिया में
वो हर वक़्त है खोए रहते
पहले के जितना मेहनत
अब वो नही करते
दोस्तो के संग मौजमस्ती
उन्हे खूब है भाता
घर का अनुशासन भी
अब उतना रास नहीं आता
आजकल के बच्चे
नही लगते अब उतने सच्चे
माँ-बाप की डांट को
नही मानते वो अच्छे
आधुनिकता के नाम पर
वो बस फैशन मे खोए रहते
बड़ो का मान सम्मान करना भी
अब वो जरूरी नहीं समझते
नाचने- गाने और सैर सपाटा मे
उनको बड़ा ही मजा आता
पढ़ाई- लिखाई भी उन्हे
अब कम ही है भाता इसलिए आजकल के बच्चे
नही लगते अब सच्चे

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