पठन कौशल विकास के लिए कैसे काम करें शिक्षक?

पठन कौशल विकास के लिए कैसे काम करें शिक्षक?

पठन कौशल के विकास में शिक्षक की क्या भूमिका होती है। यह पोस्ट इसी विषय पर केंद्रित है। सबसे अहम बात है कि पठन कौशल के विकास का एक रिश्ता पढ़ने की आदत से भी है। इसमें शिक्षक बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

उदाहरण के तौर पर बच्चों को कहानियां पढ़कर सुनाना, कहानी की किताबों के प्रति एक मोह पैदा करना, कविताओं की किताबों के जरिए भाषा के सौंदर्य के स्वाद चखने के लिए बच्चों को आमंत्रित करने वाली भूमिकाएं निभाकर शिक्षक बच्चों के लिए किताबों की दुनिया का दरवाज़ा खोल सकते हैं।

शिक्षक की भूमिका

किसी भाषा के कालांश में काम करते समय एक शिक्षक सबसे पहले सुनकर समझने की क्षमता का विकास जरूरी होता है। ताकि एक बच्चा शिक्षक के निर्देशों को समझ पाए और उस भाषा की कहानियों और कविताओं को सुनकर समझ पाए। उसका आनंद ले पाए।

इससे बच्चा एक स्तर पर उस भाषा  वाले पक्ष पर जाने के लिए तैयार हो जाता है। वह लिखित प्रतीकों व ध्वनि प्रतीकों के बीच एक संबंध बैठा पाता है, यानि  सीखता है। इसके बाद जब वह रफ्तार के साथ कई अक्षरों को मिलाकर एक शब्द पढ़ता है और वह शब्द उसने पहले सुना है तो वह उस शब्द का अर्थ भी जान पाता है।

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