हमारी दीपो की दीपावली

‘तमसो माँ ज्योतिर्गमय’ की वेदोक्ति हमें अन्धकार को छोड़ प्रकाश की ओर बढ़ने की विमल प्रेरणा देती है ।

अन्धकार अज्ञान तथा प्रकाश ज्ञान का प्रतीक होता है । जब हम अपने अज्ञान रूपी अन्धकार को हटाकर ज्ञान रूपी प्रकाश को प्रज्जलित करते हैं, तो हमे एक असीम व अलौकिक आनन्द की अनुभूति होती है ।दीपावली का त्यौहार मनाने के पीछे यही आध्यात्मिक रहस्य निहित है ।

दीप+अवलि से दीपावली शब्द की व्यत्पत्ति होती है । इस त्यौहार के दिन दीपो की अवलि पक्ति बनाकर हम अन्धकार को मिटा देने में जुट जाते हैं । दीपावली का यह पावन पर्व कार्तिक मास की अमावस्या के दिन मनाया जाता है । आज भी इस दिन घर में महालक्ष्मी की पूजा होती है ।

दीपावली जहाँ अन्त:  करण के ज्ञान का प्रतीक है वही बाह्य स्वच्छता का प्रतीक भी है । घरों में मच्छर, खटमल, पिम्स आदि विषैले किटाणु धीरे-धीरे अपना घर बना लेते हैं । मकड़ी के जाले लग जाते हैं, इसलिये दीपावली से कई दिन पहले से ही घरो की लिपाई-पोताई-सफेदी हो जाती है । सारे घर को चमका कर स्वच्छ किया जाता है ।

घर की सफाई केई साथ हमे अपने मन को भी स्वच्छ रखना है l इस बार हमे प्रण लेना चाहिए कि हम किसी भी तरह के विदेशी समान का उपयोग हमारे इस पुण्य पर्व पर नही करेंगे l स्वच्छता का ध्यान देंगे Lदीपावली दीपों का त्योहार है और हम देशी दियों से अपने घर को सजाएँगे l

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